शिक्षा और स्वास्थ्य जनहित में बेहतर बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों को नींद से जागना होगा ?

Ramesh agrawal
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शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए जनप्रतिनिधियों को नींद से जागना होगा ? ....
" आखिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की कब होगी स्थापना ? "
" स्थायी चिकित्सक से मगरुर क्यों है कोसीर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद ? " 
वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीनारायण लहरे 
सारंगढ़ । अमृत काल के बाद भी गांव की स्थित में कोई सुधार नहीं हुआ आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली की समस्याएं बनी हुई है । कोसीर गांव में पहले शिक्षा पहुंची 1904 में  फिर 1960 के दशक में स्वास्थ्य और 1960 दशक के अंतिम में  बिजली । कोसीर गांव ऐतिहासिक गांव है यह दो राय नहीं है सारंगढ़ रियासत से कोसीर गांव की देवी मंदिर की पूजा अर्चना जुड़ी थी । छत्तीसगढ़ राज्य बने 26 वर्ष हो गए और यहां की स्वास्थ्य और शिक्षा में कोई विशेष बदलाव नजर नहीं आ रहे है। पिछले 20 वर्षों से यहां नवीन कॉलेज की स्थापना की मांग के बाद भी कुछ विशेष बातें नहीं हो सका । 
बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य जीवन को सार्थक बना सकता है ।शिक्षा एक ओर रोज़गार के द्वार खोलते हैं वहीं समाज में पहचान बनाती है । स्वास्थ्य जीवन का आधार है ।स्वस्थ शरीर हमें संघर्ष के लिए प्रेरित करता है अस्वस्थता जीवन के उत्सव को खत्म ।शिक्षा और स्वास्थ्य इंसान को मजबूत बनाता है । हमें शिक्षा और स्वास्थ्य पर समझौता नहीं करना चाहिए । 
शिक्षा के इतिहास पर गौर करें तो कोसीर गांव में आजादी के पहले 1904 में प्राथमिक स्कूल खुल चुकी थी लोग पढ़ने पहुंच रहे थे वहीं प्राथमिक शिक्षा से माध्यमिक शिक्षा भी की ओर आगे बढ़ रहे थे माध्यमिक शिक्षा में उस समय बड़ी बदलाव आए जब गांव के किसान परिवार से दादा मुन्ना दास ने अपनी खेत बेचकर स्कूल निर्माण में अपना योगदान दिए । वही स्वास्थ्य को लेकर गौर किया जाए तो 1960 के दशक के पहले गांव में कोई सुविधा नहीं थी लोग सरसिंवा जाते थे । 1960 दशक के कुछ वर्षों बाद कोसीर में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा किराए के भवन में उप स्वास्थ्य केंद्र प्रारंभ हुई उस समय यहां आर्युवेद डॉक्टर अपनी सेवा दे रहे थे इतिहास पर गौर करें तो 1960 के दशक में डॉ चिंचोलकर , डॉ खंडेलवाल , डॉ एम के गुप्ता जैसे अनेक डॉक्टर कोसीर में अपनी सेवाएं दिए ।वही 1985 के आस पास एम बी बी एस डॉ विजय आनंद 
कोसरिया, डॉ परदेशी , बी के चंद्रवंशी , डॉ एम के मनहर , डॉ पुजारी , और आर एम ए अर्जुन ध्रुव रहे । डॉ अर्जुन ध्रुव के जाने के बाद से यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था कहें या विभाग की लापरवाही स्थायी डॉक्टर नहीं मिल सका ।डॉक्टर तो आए पर व्यवस्थित नहीं हो पाया । पिछले एक दशक से अधिक समय से कोसीर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था में काफी बदलाव देखे गए यहां तक कि डॉक्टर की अभाव से प्राथमिक उपचार भी मुश्किल हो गया था । वर्तमान व्यवस्था की बात करे तो अप्रैल 2026 में डॉ गौरव साहू को यहां की जिम्मेदारी दी गई थी ।वे पी जी के परीक्षा के लिए जुलाई से एक माह की छुट्टी में है। 15 अगस्त के बाद से अनुबंधित एम बी बी एस डॉक्टर के भरोसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है । अस्थाई रूप से डॉ नेहा साहू और डॉ चिन्मय पाणिग्रही केंद्र को जिंदा रखे हैं ?  प्रधान मंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान सारंगढ़  विकास खंड के कोसीर और 
गोडम  समय सीमा में चल रहे हैं । 
सत्र 2018 से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोसीर सह आयुष केंद्र संचालिल हैं । वही कोसीर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोसीर के आर एम ए (ग्रामीण चिकित्सा सहायक ) को गोडम का अतिरिक्त भार दिया गया है जबकि उनका पद स्थापना कोसीर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर है । वही डॉ वसीम खान होम्योपैथी चिकित्सा अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे है । यहां पदस्थ ग्रामीण चिकित्सा सहायक अधिकारी को आखिर गोडम की अतिरिक्त भार क्यों? वही लेब टेक्नीशियन यहां हफ्ते में सिर्फ 03 दिन ही आता है और अन्य दिन उन्हें दूसरे जगह की जिम्मेदारी दे दी गई है इस तरह कोसीर के साथ सौतेला व्यवहार क्यों?  2021 के बाद से अस्थाई डॉक्टरों के भरोसे कोसीर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है । छत्तीसगढ़ अलग होने के बाद से यहां की मूलभूल सुविधाओं में आखिर परिवर्तन क्यों नहीं आया ।  लंबे समय से स्थायी चिकित्सक का अभाव है आम जनता इस समस्या से जूझ रही है यह अंचल के लिए दुर्भाग्य है स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं आखिर क्यों? जिले के सबसे बड़े गांव की अनदेखी बेहद दुर्भाग्य है ।आखिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को डॉक्टर की कमी क्यों । बार बार डॉक्टरों के बदलने से स्वास्थ्य सेवाओं में  लोगों को लाभ नहीं मिल पाता है । डॉक्टरों की कमी का खामयाजा लोग भुगत रहे हैं ।

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छत्तीसगढ़ के तात्कालिक मुख्यमंत्री अजीत जोगी  कोसीर बौद्ध बिहार में भगवान बुद्ध की प्रतिमा अनावरण में अपनी मंत्री मंडल के साथ कोसीर गांव पहुंचे हुए थे इस दौरान उन्होंने मंच से कोसीर को बड़ी सौगात देते हुए घोषणा की थी कि कोसीर में 10 बिस्तर का चिकित्सालय का निर्माण किया जाएगा जहां दो डॉक्टर अपनी सेवा देंगे उनके साथ शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री कृष्ण कुमार  गुप्ता एवं नंदकुमार पटेल  पहुंचे हुए थे। बौद्ध बिहार के संस्थापक प्रज्ञासार ने अथक मेहनत से मुख्यमंत्री  को यहां कार्यक्रम में बुलाए थे । नई सरकार बनने के बाद तात्कालिक मुख्यमंत्री की घोषणा पर यहां 29 मई 2008 में नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का संसदीय सचिव देव लाल दुग्गा  के द्वारा वर्चुअल भवन का लोकार्पण सारंगढ़ में हुआ। 2001की घोषणा 2008 में पूरी हुई और 10 बिस्तर के जगह 06 बिस्तर का ही निर्माण हुआ ।इसके पूर्व यहां 1960 के दशक में उप स्वास्थ्य केंद्र था यहां पहले से ही एम बी बी एस डॉक्टरों ने अपनी सेवाएं दिए । वर्तमान भाजपा  सरकार के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  के द्वारा सारंगढ़ प्रवास के दौरान 19 जनवरी 2025 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का  उन्नयन करते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य  केंद्र की घोषणा की गई है ।  आज यहां स्वास्थ्य की स्थिति में लाभ मिलना चाहिए नहीं मिल पा रही है । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा को डेढ वर्ष हो गए । उनकी इस घोषणा से अंचल के लोगों में उम्मीद जगी थी । आखिर कोसीर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की उन्नयन की घोषणा पर अमल होगा यह बात गर्भ में छुपी है। 
कोसीर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी और स्थायी नियुक्ति के लिए जनपद सदस्य हिरा भैरव नाथ जाटवर कोसीर के द्वारा जिला चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिख कर समस्या से अवगत कराया गया है ।वर्तमान में स्वास्थ्य की यह समस्या बड़ी समस्या है ।यहां स्थायी डॉक्टर का अभाव लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है । 
क्या कहते हैं गांव के ग्रामीण .....
कोसीर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी डॉक्टर जरूरी है यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुलेगा तो पूरे अंचल को लाभ मिलेगा 
   - विष्णु चंद्रा,
कोसीर जनपद सदस्य हिरा भैरव नाथ जाटवर ने डॉक्टर की समस्या पर बोली कि मेरे द्वारा आवेदन देकर स्थायी डॉक्टर की मांग की गई है ।यह क्षेत्र बड़ा क्षेत्र है यहां एम बी बी एस का होना जरूरी है 
- श्रीमती हिरा भैरवनाथ 
जाटवर 
सामाजिक कार्यकर्ता सहदेव प्रसाद सुमन ने कहा यहां पहले डॉक्टर स्थायी हुआ करते थे अब नहीं यहां स्थायी डॉक्टर जरूरी है ।
सहदेव प्रसाद सुमन

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