सारंगढ़ सियान सदन की मां सुमित्रा खूंटे नहीं रहीं, अंतिम विदाई में नम हुईं हर आंखें, दुःखी हुआ हर मन ...
सारंगढ़। सारंगढ़ सियान सदन वृद्ध आश्रम का आंगन आज गमगीन था। आश्रम में पिछले एक साल से मां की तरह रह रही 84 वर्षीय श्रीमती सुमित्रा खूंटे का आकस्मिक निधन हो गया।
वे सरसिंवा के रायकोना गांव की निवासी थीं और पति स्वर्गीय सेत राम के जाने के बाद से अकेली थीं। पिछले साल बेटे-बेटियों ने उन्हें सियान सदन में छोड़ दिया था। तब से यहीं आश्रम ही उनका घर बन गया था।
उनका अंतिम संस्कार सारंगढ़ स्थानीय श्मशान घाट में किया गया।
खबर मिलते ही सियान सदन की सभी बुजुर्ग माताएं इकट्ठा हो गईं। जिस थाली में सुमित्रा मां खाना खाती थीं, जिस चारपाई पर बैठकर राम नाम जपती थीं, उसी के पास बैठकर सबने नम आंखों से उन्हें याद किया।
कोई कह रही थी "दीदी सुबह साथ चाय पी थी", तो कोई उनका कंबल सहेज रही थी। आश्रम का माहौल बिल्कुल घर जैसा हो गया था - जैसे एक परिवार की मां चली गई हो।
हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार हुआ।
सियान सदन की संस्था प्रमुख और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती हीरा देवी निराला ने खुद आगे आकर सुमित्रा मां का अंतिम संस्कार हिंदू धर्म की रीति-रिवाज से कराया और मुखाग्नि दी।
अंतिम यात्रा में सियान सदन की सभी माताएं, स्टाफ और स्थानीय लोग शामिल हुए। सफेद साड़ी में लिपटी अर्थी को कंधा देते समय कई माताओं की आंखें भर आईं।
श्रद्धांजलि ..
संस्था प्रमुख हीरा देवी निराला ने कहा - _"सुमित्रा मां बहुत शांत स्वभाव की थीं। सुबह-शाम राम नाम लेती थीं। आज वो हमें छोड़कर चली गईं, लेकिन सियान सदन की हर दीवार उनकी यादें समेटे हुए है।"
सियान सदन परिवार ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले और शोकाकुल परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति मिले।

