एक ओर तो यह विपक्षी दल के राजनेताओं के लिए सरकार के खिलाफ बोलने का स्वर्णीम अवसर बनकर सामने आया है,
तो दूसरी ओर खाद्यान वस्तुओं की दरों में यह बढ़ोतरी का यह अवसर आमजन के लिए बड़ी मुसीबत की वजह बनकर सामने आया है,
राजनीतिक बयानबाजी और दांवपेंच के बीच फंसी आमजनता के घर पर किचन के बजट बिगड़ने के कारण जनता परेशान नजर आ रही हैं!

