शराब और चखना का शौक बन सकता है मौत का कारण? कोसीर चखना दुकान में लेन-देन को लेकर युवक पर जानलेवा हमला !

Ramesh agrawal
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छत्तीसगढ़ सरकार की चखना सेंटर की सोच पर बदमाशों ने लगाया पलीता, संचालक और सहयोगियों पर मारपीट का आरोप

कोसीर के युवक लखन लहरे और मनोज सुमन के साथ 27 अगस्त की रात 9.30 बजे हुई वारदात, पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू की जांच

सारंगढ़ ।छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री के साथ सरकार ने शराब प्रेमियों के लिए चखना दुकान (फूड जोन) की स्थापना की है। सरकार की सोच यह थी कि शराब पीने वाले लोग सड़क किनारे अराजकता न फैलाएं, बल्कि एक व्यवस्थित जगह पर बैठकर चखना खाते हुए शराब का सेवन करें। इससे राजस्व भी बढ़ेगा और कानून व्यवस्था भी बनी रहेगी। सरकार की यह सोच अच्छी थी, लेकिन जमीनी हकीकत में इस पर तब पलीता लग जाता है, जब इन्हीं चखना दुकानों में गुंडागर्दी और जानलेवा हमले की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसी ही एक सनसनीखेज घटना सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के कोसीर गांव के देसी-विदेशी शराब दुकान के समीप स्थित शासकीय चखना दुकान में सामने आई है। जहां चखना के लेन-देन और मामूली विवाद में चखना दुकान के संचालक और वहां काम कर रहे उसके सहयोगियों द्वारा एक युवक पर जानलेवा हमला कर दिया गया। हमले में युवक को गंभीर और गहरी चोटें आई हैं। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और शराब दुकानों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या है पूरा मामला?  27 अगस्त की रात की घटना

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना 27 अगस्त की रात करीब 9.30 बजे की है। जहां कोसीर निवासी रिपोर्टकर्ता लखन लहरे और उसका साथी मनोज कुमार सुमन शराब दुकान से शराब लेकर चखना दुकान पर पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि उनके पहुंचने से पहले ही कोसीर के ही मनोज सुमन के पहचान के कुछ अन्य साथी पहले से चखना दुकान में बैठे हुए थे। वहीं प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित के अनुसार, चखना दुकान में पहले से बैठे युवकों के साथ चखना दुकानदार का चखने के पैसे को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि चखना संचालक द्वारा ग्राहकों से अधिक पैसे वसूले जा रहे थे और इसी बात को लेकर कहासुनी हो रही थी। वहीं जब लखन लहरे और मनोज सुमन वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि उनके गांव के युवकों के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने बीच-बचाव करने और समझाने की कोशिश की। बस यही बीच-बचाव करना उस युवक को महंगा पड़ गया। जहां आरोप है कि चखना संचालक और उसके साथ काम करने वाले 2-3 सहयोगियों ने अचानक आक्रामक होकर मनोज कुमार सुमन  पर हमला कर दिया। उन्होंने लाठी-डंडे, कांच की बोतल और हाथ-मुक्कों से युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी। खून से लतपत हो गया ।वहीं हमले में युवक के सिर, हाथ और पीठ पर गंभीर चोटें आईं। वह खून से लथपथ होकर वहीं गिर पड़ा। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास बैठे शराब पीने वाले लोग भी डर के मारे भाग खड़े हुए।

दोस्त के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ खड़ा होना पड़ा भारी

जहां पीड़ित मनोज सुमन  के परिजनों का कहना है कि मनोज  का कोई कसूर नहीं था। वह तो सिर्फ अपने गांव के युवक के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ खड़ा हुआ था। वहीं परिजनों ने बताया मनोज  बहुत सीधा लड़का है। वह अपने दोस्त के साथ चखना खाने गया था। वहां चखना वाले गुंडागर्दी कर रहे थे। जब रुपए के लेन देन  कहा कि भैया गरीब लोगों से ज्यादा पैसा मत लो, गाली मत दो तो उन्होंने उसे ही मारना शुरू कर दिया।
वहीं पीड़ित युवक को पहले कोसीर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे सारंगढ़ जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार युवक के सिर पर 8 टांके आए हैं और हाथ में फ्रैक्चर की आशंका है।
कोसीर पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज

घटना के बाद पीड़ित के साथी मनोज कुमार सुमन ने तत्काल कोसीर पुलिस थाने में जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई। और पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर चखना दुकान संचालक  जितेंद महिलाने उसकें पिता शिव नंदन महिलाने और उसके  विशेष सहयोगियों  में प्रकाश बंजारे के खिलाफ धारा 115(2), 117(2), 296, 351(2) BNS के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में ढील बरत रही है। आरोपी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं।

सरकार की अच्छी योजना पर लग रहा पलीता

छत्तीसगढ़ सरकार ने शराब दुकानों के साथ चखना सेंटर की योजना इसलिए शुरू की थी ताकि शराबी सड़क पर, सार्वजनिक स्थानों पर शराब न पिएं। अवैध चखना दुकानों पर रोक लगे। लोगों को रोजगार मिले। शांति व्यवस्था बनी रहे। लेकिन कोसीर जैसी घटनाएं सरकार की इस पूरी योजना पर सवाल खड़ा कर रही हैं। आरोप है कि कई जगहों पर चखना दुकान का ठेका लेने वाले लोग शराबियों से दोगुने-तिगुने दाम पर चखना बेचते हैं। चखने की क्वालिटी भी खराब होती है। विरोध करने पर मारपीट और गाली-गलौज आम बात हो गई है। वहीं स्थानीय लोगों ने बताया कि कोसीर चखना दुकान में पहले भी कई बार इस तरह के विवाद हो चुके हैं। शाम होते ही वहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। शराब दुकान बंद होने के बाद भी चखना दुकान देर रात तक खुली रहती है, जहां अवैध रूप से शराब पिलाई जाती है।

शराब दुकानें बन रही हैं अपराध का अड्डा?

यह घटना एक बार फिर सोचने पर मजबूर करती है कि क्या शराब और चखना दुकानें अपराध का अड्डा बनती जा रही हैं? क्या चखना दुकानों पर कोई रेट लिस्ट नहीं होनी चाहिए? क्या वहां पुलिस की गश्त नहीं होनी चाहिए? क्या सीसीटीवी कैमरा अनिवार्य नहीं होना चाहिए? क्या संचालकों का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं होना चाहिए? जहां स्थानीय ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और आबकारी विभाग से मांग की है कि कोसीर चखना दुकान का लाइसेंस तत्काल निरस्त किया जाए और आरोपी संचालक को गिरफ्तार किया जाए। साथ ही सभी चखना दुकानों में रेट लिस्ट, सीसीटीवी और पुलिस सुरक्षा अनिवार्य की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। वहीं लोगों ने कहा शराब और चखने का शौक कहीं आपकी मौत का कारण न बन जाए, इसलिए सरकार को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब देखना होगा कि इस जानलेवा हमले के आरोपियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या आबकारी विभाग अपनी चखना सेंटर नीति में सुधार करता है।

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