संसद में बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया एल्युमिनियम उद्योगो के हानिकारक कचरे के निपटान का मुद्दा !

Ramesh agrawal
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नई दिल्ली। एल्युमिनियम उद्योगों से निकलने वाले अति-विषैले औद्योगिक कचरे स्पेंट पॉट लाइनिंग और इसके अवैध निपटान का मुद्दा सोमवार को संसद में गूंजा। रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में इस गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य से जुड़े मामले को उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से एल्युमिनियम संयंत्रों से निकलने वाले जहरीले कचरे के गलत इस्तेमाल, कोयले में मिलावट और इससे होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर जानकारी मांगी। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से सवाल करते हुए कहा कि एल्युमिनियम उद्योगों से निकलने वाला स्पेंट पॉट लाइनिंग बेहद खतरनाक अपशिष्ट है। उन्होंने चिंता जताई कि कुछ औद्योगिक इकाइयों द्वारा कथित रूप से इस विषैले कचरे को वाणिज्यिक कोयले में मिलाकर इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हैं, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। लोकसभा में सांसद ने एल्युमिनियम उद्योगों द्वारा प्रस्तुत पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए सरकार से पूछा कि विषैले औद्योगिक कचरे के कारण आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने सीमेंट उद्योगों में SPL के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था और पिछले पांच वर्षों में नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की जानकारी भी मांगी। बृजमोहन अग्रवाल ने यह भी मांग की कि यदि तृतीय पक्ष विक्रेता या एजेंसियां SPL के निपटान में लापरवाही करती हैं तो केवल विक्रेताओं को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए, बल्कि मूल एल्युमिनियम उत्पादक कंपनियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्योगों के आसपास रहने वाले नागरिकों को स्वच्छ हवा, साफ पानी और सुरक्षित पर्यावरण उपलब्ध कराना सरकार और उद्योगों की जिम्मेदारी है।सांसद के सवालों के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक कोयले में स्पेंट पॉट लाइनिंग (SPL) की मिलावट पूरी तरह प्रतिबंधित और गैर-कानूनी है। उन्होंने बताया कि खतरनाक एवं अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन तथा सीमापार परिवहन) नियम, 2016 के तहत SPL को अति-खतरनाक अपशिष्ट की श्रेणी में रखा गया है। केंद्र सरकार ने कहा कि SPL का निपटान केवल अधिकृत रीसाइक्लर्स या ट्रीटमेंट, स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी के माध्यम से ही किया जा सकता है। इसे कोयले में मिलाना या बाजार में बेचना नियमों का उल्लंघन है और ऐसी गतिविधियों में शामिल इकाइयों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। Also Read - शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश ही समृद्ध छत्तीसगढ़ की नींव: मंत्री टंकराम वर्मा सरकार ने यह भी बताया कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड  को कार्रवाई के व्यापक अधिकार दिए गए हैं। इनमें उद्योगों को बंद करने, पर्यावरणीय जुर्माना लगाने और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने जैसी कार्रवाई शामिल है। केंद्र सरकार ने जानकारी दी कि एल्युमिनियम उद्योगों के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व व्यवस्था भी लागू की गई है। इसके तहत एल्युमिनियम उत्पादक कंपनियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के डिजिटल पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा और अपने विषैले औद्योगिक कचरे के सुरक्षित प्रबंधन और रीसाइक्लिंग की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल है और यहां कई बड़े एल्युमिनियम संयंत्र संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास जरूरी है, लेकिन इसकी कीमत आम नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर नहीं चुकाई जा सकती। उन्होंने कहा कि स्पेंट पॉट लाइनिंग जैसे जहरीले कचरे को कोयले में मिलाकर बेचना हवा, पानी और मिट्टी को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अपील की कि छत्तीसगढ़ में संचालित एल्युमिनियम संयंत्रों, विक्रेताओं और सीमेंट उद्योगों की नियमित निगरानी की जाए। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यदि कोई भी इकाई पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करती पाई जाती है तो केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर संयंत्रों को सील करने और आपराधिक कार्रवाई जैसे कठोर कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के नागरिकों को स्वच्छ हवा और पानी उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।


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