साक्षात्कार
यह सम्मान मेरे अग्रज संपादकों और पत्रकार साथियों का है: लहरे
वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार लक्ष्मीनारायण लहरे 'साहिल' से राजकुमार धर द्विवेदी की बातचीत
रायपुर ।लक्ष्मीनारायण लहरे 'साहिल' सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार हैं। वे पिछले 26-27 वर्षों से पत्रकारिता और हिंदी काव्य सृजन में सक्रिय हैं। उन्हें रायपुर के लोकप्रिय साहित्यिक और सामाजिक मंच साहित्य सृजन संस्थान द्वारा 23 अगस्त को राजधानी रायपुर के वृंदावन हॉल में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में श्रेष्ठ पत्रकार सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। प्रस्तुत हैं श्री लहरे से हुई बातचीत के संपादित अंश -
प्रश्न : लहरे जी, आपको रायपुर साहित्य सृजन संस्थान द्वारा 'श्रेष्ठ पत्रकार सम्मान 2026' के लिए चुना गया है। सबसे पहले आपको बहुत बधाई। इस सम्मान को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर : आपका बहुत आभार। यह सम्मान मेरे लिए भावुक क्षण है। देखिए, मैं इसे व्यक्तिगत सम्मान नहीं मानता। यह सम्मान मेरे अग्रज संपादकों और मेरे उन सभी पत्रकार साथियों का सम्मान है, जो पिछले 26-27 वर्षों से मेरे संवाद को पाठकों तक पहुंचाते रहे हैं। यह सारंगढ़, रायगढ़, रायपुर, बिलासपुर और प्रदेश के अन्य जिलों के उन सभी संपादकों का सम्मान है, जिन्होंने मुझे गढ़ा है। मैं हृदय से इसे अपने अग्रजों को समर्पित करता हूं।
प्रश्न : आपकी दोहरी यात्रा रही है - पत्रकारिता और साहित्य। लगभग तीन दशक का लंबा सफर। इस सफर को आप कैसे याद करते हैं?
उत्तर: पत्रकारिता मेरे लिए पेशा नहीं, समाज के प्रति दायित्व है। एक सजग प्रहरी के रूप में काम करना और साहित्य मेरी आत्मा है। मैं 'साहिल' उपनाम से काव्य सृजन करता हूं। मुझे छत्तीसगढ़ काव्य रत्न, काव्य श्री, काव्य गौरव, साहित्य कला रत्न और दबंग हिंदी सेवा सम्मान जैसे सम्मानों से संस्थाओं ने नवाजा है, लेकिन असली सम्मान तो तब मिलता है, जब आपकी एक खबर से किसी गरीब को न्याय मिले और आपकी एक कविता किसी के हृदय को छू जाए।
प्रश्न: आज के समय में एक साहित्यकार और एक पत्रकार की देश और समाज के प्रति क्या भूमिका होनी चाहिए?
उत्तर: बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है। देखिए,
एक पत्रकार को निष्पक्ष, निर्भीक और जनपक्षधर होना चाहिए। उसे सत्ता की चाटुकारिता नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज बनना चाहिए। सच को सच कहना आज सबसे बड़ा साहस है।
और एक साहित्यकार को समाज का पथ-प्रदर्शक होना चाहिए। साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मूल्यों का संवाहक है। जब पत्रकारिता तथ्यों से समाज को जगाती है तो साहित्य संवेदना से समाज को जोड़ता है। दोनों का लक्ष्य एक ही है - बेहतर देश और बेहतर समाज का निर्माण। दोनों को अपनी लेखनी से नैतिक चेतना जगानी चाहिए।
प्रश्न : 23 अगस्त को रायपुर में राष्ट्रीय स्तर का कवि सम्मेलन हो रहा है, जहां देश भर से आए चुनिंदा कवि अपनी रचना पढ़ेंगे। इस सम्मान से आपको आगे के लिए क्या प्रेरणा मिली?
उत्तर: मैं रायपुर साहित्य सृजन संस्थान के अध्यक्ष आदरणीय वीर अजीत शर्मा जी का हृदय से आभारी हूं, जिन्होंने मुझे आमंत्रित किया। इस तरह के आयोजन साहित्य को जीवंत रखते हैं। इस सम्मान से मुझे यही प्रेरणा मिली है कि सक्रियता बनाए रखनी है। पत्रकार साथियों का जो स्नेह मुझे मिल रहा है, वह मुझे और अधिक ईमानदारी से काम करने की ऊर्जा देता है। मैं और अधिक सक्रियता से साहित्य और पत्रकारिता दोनों के माध्यम से समाज की सेवा करता रहूंगा। यह सम्मान मेरी जिम्मेदारी बढ़ा देता है।
प्रश्न: युवा पत्रकारों और नवोदित साहित्यकारों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर: युवाओं से बस यही कहूंगा कि शॉर्टकट मत खोजिए। भाषा पर पकड़ बनाइए, खूब पढ़िए और जमीन से जुड़े रहिए। पत्रकारिता में धैर्य और साहित्य में निरंतर अभ्यास ही आपको स्थापित करेगा। सम्मान पीछे-पीछे आएंगे, पहले साधना जरूरी है।
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