साहित्य सृजन की स्थापना दिवस पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन ,कवियों ने बांधा समां....

Ramesh agrawal
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साहित्य सृजन की स्थापना दिवस  पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन ,कवियों ने बांधा समां....
 "गीत संग्रह 'अक्स जिंदगी के' का हुआ विमोचन"
"वरिष्ठ साहित्यकार पत्रकार लक्ष्मीनारायण लहरे और सामाजिक कार्यकर्ता हिरा देवी निराला का हुआ सम्मान" 

"वो बारिश की बूंदे है दिल को लुभाती,
वो भीगी सी यादें है हलचल मचाती।
अगर गम मे भीगी हो ,मन की चदरिया,तो देकर फुहारें कुहासा मिटाती...ममता खरे "
 वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीनारायण लहरे 
रायपुर। साहित्य सृजन  संस्थान, रायपुर ने अपना पंचम स्थापना दिवस शनिवार 23 अगस्त को स्थानीय वृंदावन हॉल में हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के ख्यातिनाम कवियों ने काव्य की ऐसी धारा बहाई कि श्रोता भावविभोर हो उठे। साहित्य सृजन संस्थान के संरक्षक संजय अलंग अध्यक्ष वीर अजीत शर्मा कवित्री पूनम माटिया ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम को आगे बढ़ाए।
कवि सम्मेलन कार्यक्रम में दिल्ली की सुप्रसिद्ध कवयित्री  पूनम माटिया, पटना से प्रीति सुमन, जबलपुर से बसंत कुमार शर्मा, बैतूल से राजकुमार कोरी और रायबरेली से गोविंद गज़ब ने शिरकत की। इन सभी कवियों ने अपनी ओजस्वी वाणी से समां बांधा ।

रायपुर और आस पास के स्थानीय रचनाकारों को भी ओपन माइक के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। इनके अलावा वरिष्ठ साहित्यकार पत्रकार ,गीतकार राजकुमार धर द्विवेदी, ग़ज़लकार सुदेश मेहर और ममता खरे मधु ने काव्य पाठ कर खूब तालियां बटोरीं।
समारोह में  साहित्य सृजन संस्थान कार्यकमों उत्कृष्ठ समाचार प्रकाशन के लिए साहित्य सृजन संस्थान के द्वारा वरिष्ठ साहित्यकार ,पत्रकार लक्ष्मीनारायण लहरे को विशेष सम्मान " श्रेष्ठ पत्रकार 2026 से अलंकृत किया गया।  पत्रकार लहरे को संस्था के अध्यक्ष एवं कवियों के द्वारा  शाल  और श्रेष्ठ पत्रकार का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया । वही सारंगढ़ की सामाजिक कार्यकर्ता हिरा देवी निराला को समाज के लिए सम्मान किया गया । साहित्यकार ममता खरे मधु की  गीत संग्रह पुस्तक 'अक्स ज़िन्दगी के' का विमोचन अतिथियों के करकमलों से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में संस्था के संरक्षक डॉ. संजय अलंग (पूर्व आईएएस) की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता वीर अजीत कुमार शर्मा ने की, विशिष्ट अतिथि आकाशवाणी, रायपुर के वरिष्ठ उद्घोषक प्रकाश उदय रहे, कार्यक्रम का  सफल संचालन उमेश कुमार सोनी ने किया। कवियों ने अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में अपनी गीत ,गजल और कविताओं से समा बांधा दोपहर 12 बजे से शाम 04 बजे तक कवियों ने अपने कविताओं से चेतना जगाते रहे । कवियों के कविताओं के विशेष अंश जो कवि सम्मेलन में अपनी छाप छोड़ी ...
बेशकीमत था ख़ज़ाना, पास रखवाया ही क्यों 
अपने दुश्मन को ख़ुशी का राज़ बतलाया ही क्यों 
***
सोचते हैं ज़ालिमाना आंखें उठती देखकर 
लाज का पर्दा नज़र से हमने सरकाया ही क्यों 
***

आज दिल में और घरों में कुछ जगह छोड़ी नहीं 
इक ज़माना था कि जब हर घर में रोशनदान थे
      पूनम माटिया,दिल्ली

ये बेरुख़ी नहीं तो कोई बेबसी है क्या।
तू फोन भी न कर सके इतना बिज़ी है क्या।
तुम कह रहे हो मुझको भुला दो ख़ुशी ख़ुशी।
लेकिन तुम्हीं बताओ ये इतना इज़ी है क्या।
माँगा है उनको रब से मगर ये तो सोचिए
सबकी दुआ क़ुबूल हो कम्पलसरी है क्या

रोज़ मरना पड़ रहा है ज़िंदगी के नाम पर
अब तो लानत है तुम्हारी रहबरी के नाम पर।
देखिए इन जुगनुओं का है बहुत तगड़ा जुगाड़
जो पुरस्कृत हो रहे हैं रोशनी के नाम पर।
हर महाभारत के पीछे हैं कई खुदगर्ज़ियाँ
ठीकरे फूटे हैं केवल द्रौपदी के नाम पर।
राज़ खतरे में है सारी चुप्पियों का अब वजूद।
इतना हल्ला हो रहा है ख़ामुशी के नाम पर।


पुराने यार मिल जाएँ जो हमसे छूट जाते हैं।
तकल्लुफ़ क्या हमारे सब सलीके छूट जाते हैं।
बहुत आसान होता है कहीं रिश्ते बना लेना।
मगर इनको निभाने में पसीने छूट जाते हैं।

-राजकुमार राज़

 पत्थर  दिल  वाले  मखमल  हो  जाते हैं। 
प्रिय  की आँखों  का काजल हो जाते हैं। 
प्यार  जो  करते  हैं  वो  प्यार  निभाने में, 
थोड़े - थोड़े   से   पागल   हो   जाते   हैं।
                डॉ गोविन्द 'गजब' गीतकार, रायबरेली, यू पी


चाहत का इज़हार किया है उसका क्या? 
एक  नहीं  सौ बार किया है उसका क्या? 
सारी  दुनिया   मुझे  चाहती  है   लेकिन, 
मैंने  तुझसे  प्यार किया है, उसका क्या? 
                  डॉ. गोविन्द 'गजब' 
           रायबरेली, यू पी


अब   बात   बात   पर   वो   मुझे   डाँट  रही  है। 
ये   प्यार    व्यार    जाने   कहाँ   बाँट   रही   है। 
एस आई आर के बहाने अपने दिल की लिस्ट से, 
चुपके   से   मेरा   नाम   अब   वो काट  रही  है।
          डॉ गोविन्द 'गजब', रायबरेली, यू पी

पाप सब अपने मिटाने चल दिए, 
लोग गंगा में नहाने चल दिए,
तीर्थ घर में, है हमारे सोचकर,  
पाँव हम माँ के दबाने चल दिए.

सिर के ऊपर बाज है, नीचे तीर कमान। 
खतरा है, फिर भी भरे, चिड़िया रोज उड़ान।।
एक पियाला प्रेम का, अधरों पर मुस्कान।
मित्र हमारे पास बस, इतना ही सामान।।

हमने देखे प्रेम के, बस दो ही आकार।
राई के जैसा मिलन, विरह पर्वताकार।।
   बसंत कुमार शर्मा,जबलपुर

सीतामही से विश्व पटल तक तेरे ही कारण है कीर्ति हमारी, 
कहती है दुनिया की देखो ये आई सीतामही से सीता कुमारी, 

लव-कुश जैसे ही घूम-घूम के गाएंगे गुण तेरे जनक दुलारी, 
सब को बताएंगे धर्म की बातें, सब को सुनाएंगे बातें तुम्हारी, 


कामना की प्रार्थना में याचना निष्काम का है,
तुम न कुछ बोली हो रत्ना, ये संदेशा राम का है।
    डॉ. प्रीति सुमन, पटना


वो बारिश की बूंदे है दिल को लुभाती,
वो भीगी सी यादें है हलचल मचाती।
अगर गम मे भीगी हो ,मन की चदरिया,तो देकर फुहारें कुहासा मिटाती।

ममता खरे 'मधु'


जो पक्ष में ख़ुद के खड़ा नहीं
पथरीले पथ पर बढ़ा नहीं
वो क्या चोटी चढ़ पाएगा
जो पहला टीला चढ़ा नहीं 

जो बात पे अपनी अड़ा नहीं 
जो पारिजात सा झड़ा नहीं
वो हारे बिन ही हारा है
जो जीत की ख़ातिर लड़ा नहीं
- पंखुरी 

 गीत तुम पर लिखे थे जो मैंने 
हल्दी अक्षत अबीर हो गए हैं 

लफ़्ज़ मीरा हुए हैं मेरे सब 
और मिसरे कबीर हो गए हैं
             सुदेश मेहर 
कवि सम्मेलन के अंत कार्यकम में पहुंचे कवियों का साहित्य सृजन संस्थान ने शाल भेंट करते हुए प्रतीक चिन्ह भेंट कर कार्यक्रम को यादगार बनाए ।

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