हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ में कोटवारों की सेवा भूमि पर मालिकाना हक खत्म; 1950 पूर्व की मालगुजारी व्यवस्था का हवाला

Ramesh agrawal
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खबर वर्ल्ड न्यूज सर्विस-बिलासपुर। हाईकोर्ट ने कोटवारों और उसके उत्तराधिकारियों की सेवा भूमि पर मालिकाना हक के एक महत्वपूर्ण मामले में निर्णय सुनाया है। चीफ जस्टिस समेत तीन जजों की फुल बेंच ने कहा कि 1950 में जमींदारी उन्मूलन से पूर्व मालगुजारों या जमींदारों द्वारा कोटवारों को सेवा के बदले दी गई जमीन पर कोटवार या उनके वारिस भू स्वामी अधिकार का दावा नहीं कर सकते। बता दें, कि दो डिवीजन बेंच के ऑर्डर 

में विरोधाभास के बाद सिंगल बेंच ने मामला पूर्ण पीठ (फुल बेंच) को रेफर किया था।
दरअसल, कबीरधाम जिले के गजेंद्र दास और स्थानीय जरहाटोला निवासी सुकृत दास ने हाईकोर्ट में याचिका पेश कर पूर्व में हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देकर सेवा भूमि पर मालिकाना हक देने की मांग की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने पाया कि दो अलग अलग डिवीजन बेंचों के निर्णय में परस्पर विरोधाभास है। इसी विरोधाभास को देखते हुए मामले को फुल बेंच के लिए रेफर कर दिया गया था, जहां कोटवारों के विरुद्ध हाईकोर्ट का निर्णय सामने आया है।

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